मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष के. मेघचंद्र ने सिंह के इस्तीफे का स्वागत किया है, लेकिन राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया है। उन्होंने कहा, कांग्रेस एक नए नेता और नई सरकार को चाहती है। हम राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की किसी भी योजना का विरोध करते हैं, क्योंकि जनता के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिंह को पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था क्योंकि उनकी प्रशासनिक विफलता ने राज्य को अशांति में डाल दिया है।
राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
बीरेन सिंह के इस्तीफे के कारण सोमवार से शुरू होने वाला राज्य का बजट सत्र रविवार रात को रद्द कर दिया गया। विपक्ष ने इस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई थी। इस बीच, कुकी-जो संगठन के एक प्रवक्ता ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। उनका कहना है कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए। नया मुख्यमंत्री भी कोई बदलाव नहीं ला पाएगा।
भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की मांग के बीच बीरेन सिंह ने रविवार को राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को राजभवन में अपना इस्तीफा सौंप दिया था। राज्यपाल ने सिंह और उनके मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति तक उन्हें पद पर बने रहने का अनुरोध किया था।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने लीक हुए ऑडियो टेप की फोरेंसिक रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें कथित तौर पर बीरेन सिंह पर जातीय हिंसा में भूमिका निभाने के आरोप लगाए गए थे। इन टेपों में दावा किया गया कि बीरेन सिंह ने मैतेई समूहों को अशांति के दौरान हथियार लूटने की अनुमति दी थी।
बीजेपी सूत्रों का मानना है कि बीरेन सिंह के इस्तीफे से केंद्र सरकार की शांति बहाली की कोशिशों को बल मिलेगा और राज्य में दो प्रमुख जातीय समुदायों के बीच शांति स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। गौरतलब है कि मई 2023 से अब तक मणिपुर में हुई जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
