नई दिल्ली, 24 फरवरी 2025: 26 फरवरी को महाशिवरात्रिमहाशिवरात्रि का दिन हिंदू धर्म में ‘अत्यंत शुभ’ माना जाता है। सनातन धर्म में इस पर्व का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
हालाँकि पूरे दिन शिव पूजा का विधान है, लेकिन ‘शुभ समय’ में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है। यदि मंदिर जाकर पूजा करना संभव न हो तो चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है। घर पर भी श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवलिंग की स्थापना कर सकते हैं। महाशिवरात्रि के इस विशेष दिन पर शिव की पूजा करने से सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है और परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है।
इस दिन चार प्रहरों में दूध, दही, गंगाजल, घी और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करने का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि के चार प्रहरों के शुभ मुहूर्त।
महाशिवरात्रि पर शिव पूजा का सबसे शुभ समय
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी 2025 को सुबह 11:08 बजे से शुरू होगी और 27 फरवरी 2025 को सुबह 8:54 बजे समाप्त होगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त: रात 12:09 बजे से रात 12:59 बजे तक।
उपवास का समय: सुबह 06:48 बजे से सुबह 08:54 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस अवसर पर हजारों भक्त व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का इस दिन विशेष महत्व होता है।
महाशिवरात्रि के चार प्रहरों में पूजा के शुभ मुहूर्त
- पहला प्रहर: शाम 06:19 बजे से रात 09:26 बजे तक
- दूसरा प्रहर: रात 09:26 बजे से रात 12:34 बजे तक
- तीसरा प्रहर: 27 फरवरी को रात 12:34 बजे से 03:41 बजे तक
- चौथा प्रहर: 27 फरवरी को तड़के 03:41 बजे से सुबह 06:48 बजे तक
महाशिवरात्रि का ब्रह्म मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:09 बजे से 05:59 बजे तक।
शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त का समय प्रातः 03:30 बजे से 05:30 बजे तक होता है।
महाशिवरात्रि के निशीथ काल में शिव पूजा का विशेष महत्व है।
निशीथ काल पूजा का शुभ मुहूर्त: 26 फरवरी 2025, रात 12:09 बजे से रात 12:59 बजे तक।
निशीथ काल पूजा की कुल अवधि 50 मिनट होगी।
महाशिवरात्रि पर महाकुंभ का अंतिम स्नान (शुभ मुहूर्त)
महाशिवरात्रि के दिन, महाकुंभ के अंतिम स्नान का ‘ब्रह्म मुहूर्त’ 26 फरवरी को सुबह 05:09 बजे से सुबह 05:59 बजे तक रहेगा।
महाशिवरात्रि पर बनेगा दुर्लभ योग
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर सूर्य, बुध और शनि एक साथ कुम्भ राशि में गोचर करेंगे। यह दुर्लभ संयोग इससे पहले 1965 में बना था। मान्यता है कि इस ‘दुर्लभ ग्रह संयोग’ में शिव की पूजा करने से भक्तों की इच्छाएं शीघ्र पूरी होती हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य, बुध और शनि की विशेष पूजा का शुभ अवसर रहेगा।
‘त्रिग्रही योग’ से 4 राशियों का बदलेगा भाग्य
महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ‘त्रिग्रही योग’ बनने से 4 राशियों के जातकों का जीवन पूरी तरह बदल जाएगा। इससे पहले ऐसा संयोग 1965 में बना था। आइए जानते हैं वे 4 राशियाँ, जिनके जातक इस महाशिवरात्रि पर ‘राजा’ बन सकते हैं।
- मेष राशि
- भगवान शिव की कृपा से मेष राशि के जातकों को आर्थिक क्षेत्र में बड़ी सफलता मिलेगी।
- अचानक धन लाभ के योग बनेंगे।
- रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
- पैतृक संपत्ति से लाभ होगा।
- पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे।
- मिथुन राशि
- त्रिग्रही योग मिथुन राशि के लिए भी विशेष सफलता लेकर आएगा।
- प्रतिभा को पहचान मिलेगी।
- इस दौरान मिथुन राशि के जातकों को नाम और प्रसिद्धि मिलेगी।
- धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
- सिंह राशि
- पुराने विवादों और समस्याओं का अंत होगा।
- आर्थिक संकट दूर होगा।
- छात्रों के लिए समय अनुकूल रहेगा।
- जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे।
- कुम्भ राशि
- महाशिवरात्रि पर बनने वाला ‘त्रिग्रही योग’ कुम्भ राशि में ही बन रहा है, जो इस राशि के लिए विशेष शुभ रहेगा।
- व्यापारियों को व्यापार से बड़ा लाभ होगा।
- अचानक धन लाभ के योग बनेंगे।
- स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
इस महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। यह दिन शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ एवं लाभकारी रहेगा।
