Bihar Police: बिहार पुलिस अपनी सेवा प्रदान कर रहे कर्मियों को अब काम में लापरवाही करने पर सख्त सजा देने के तैयारी में है। पुलिसकर्मी अब यदि काम में लापरवाही करेंगे तो उनके ऊपर सीधे प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
इसको लेकर पिछले दिनों वरीय अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी फैसला ले लिया गया। इसी कड़ी में तीन जिलों में 657 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसमें गोपालगंज के एसपी अवधेश दीक्षित ने लापरवाही और कर्तव्यहीनता के आरोप में 53 पुलिस अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करवाई है। यह कार्रवाई उन पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर की गई है।
उन्होंने जांचकर्ता होने के बावजूद मामलों का प्रभार ड्यूटी पर तैनात अन्य अधिकारियों को नहीं सौंपा था। उसी तरह पूर्वी चंपारण जिला के एसपी ने 104 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इस पुलिसकर्मियों ने अपने स्थानांतरण के बाद भी अपने रिलीवर को केस फाइल नहीं सौंपी है। इससे विभिन्न थानों में दर्ज कुल 990 मामलों की जांच प्रभावित हुई है।
इस लापरवाही के कारण आरोपित सभी पुलिसकर्मियों के वेतन रोक दिए गए हैं। इधर राजधानी पटना के गांधी मैदान थाना में 500 पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। यह सभी पुलिस पदाधिकारी पटना में कई थानों में पदस्थापित थे और कई केस में अनुसंधान पदाधिकारी थे।
लेकिन ट्रांसफर हो जाने के बाद इन लोगों ने केस का अनुसंधान किसी दूसरे पदाधिकारी को नहीं दिया और चले गए। इस मामले में जब समीक्षा की गई तो पता चला कि 500 से ज्यादा पुलिस के अनुसंधान पदाधिकारी केस सौंपा नही और चले गए हैं। वह केस प्रभावित हो रहा है। पटना के एसएसपी अवकाश कुमार ने 500 पुलिस अनुसंधान पदाधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दे दिया है।
मामला दर्ज हो जाने के बाद इन पुलिस अनुसंधान पदाधिकारी के खिलाफ गिरफ्तारी के साथ-साथ विभाग के कार्रवाई निलंबन की भी कार्रवाई संभव है। उल्लेखनीय है कि बिहार में 111,000 कर्मियों की स्वीकृत पद है, लेकिन कार्यरत पुलिसकर्मियों की संख्या महज 77 हजार है। इनमें 3600 वीआईपी की सुरक्षा में 13 हजार जवान तैनात हैं।
औसतन एक वीआईपी को दो पुलिसकर्मी सुरक्षा दे रहे हैं। इसमें अर्धसैनिक बल, कमांडोज भी शामिल हैं। सूबे की 11 करोड़ की आबादी की सुरक्षा की बात करें, तो औसतन 1500 लोगों पर महज एक पुलिसकर्मी तैनात है। इस तरह बिहार में 1 लाख लोगों की सुरक्षा के लिए सिर्फ 70 पुलिसकर्मी हैं। जबकि पुलिस-पब्लिक का राष्ट्रीय अनुपात 1 लाख की आबादी पर 143 पुलिसकर्मी है।
इस हिसाब से बिहार में 50 फीसदी की कमी है। सुरक्षा पाने वाले वीआईपी लोगों में मंत्री, विधायक, विधान पार्षद से लेकर नौकरशाह तक शामिल हैं। आईएएस व आईपीएस अफसरों को बॉडीगार्ड मिलते हैं। जिलों के डीएम व एसपी के अलावा अन्य आला अफसरों के साथ बॉडीगार्ड व हाउस गार्ड की भी तैनाती है। राज्य में 200 से अधिक आईएएस व 175 आईपीएस अफसर हैं।
केंद्र व राज्य के स्तर पर गठित विशेष कमेटी संबंधित लोगों पर खतरा को देखते हुए उनकी सुरक्षा का स्वरुप या सुरक्षाकर्मियों की संख्या तय करती है। वहीं, पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के संबंध में एडीजी(मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने कहा कि विभाग में अनुशासनहीनता कतई बर्दाश्त नही की जाएगी।
मनमानी करने वाले अथवा काम में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ हमलोगों ने कठोर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। समय समय पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाती रही है। अभी हमलोगों ने जिलों के एसएसपी-एसपी को यह आदेश दिया है कि केस नही सौंपने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए।
इसके बाद विभाग में उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी। अभी तक तीन जिलों गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और पटना में कार्रवाई की गई है। अन्य जिलों से भी जल्द ही विस्तृत जानकारी मिल जाएगी। उधर, पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के संबंध में पूछे जाने पर राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि बिहार में कानून का राज समाप्त हो गया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का शासन पर से नियंत्रण समाप्त हो चुका है। सरकार अधिकारी चला रहे हैं। ऐसे में यह सब कार्रवाई केवल जनता के आंख में धूल झोंकने के लिए किया जा रहा है। ऐसे हजारों पुलिसकर्मी हैं, जो लूट खसोट और मनमानी कर जनता को परेशान करते हैं। लेकिन अधिकारी जानकर भी अनजान बने रहते हैं।
वहीं, जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाता है। सरकार सभी पर कानून के अनुसार कार्रवाई करती है। यही कारण है कि अभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
जरा याद कीजिए लालू-राबड़ी के शासनकाल को जनता को पुलिस वाले डांटकर भगा देते थे। राजद के गुंडे सरेआम गुंडागर्दी करते थे। लोग दिन में भी घर से निकलने में डरते थे। लेकिन आज लोग रातभर चलते हैं, कहीं किसी प्रकार का भय का वातावरण नही है। अंतर साफ देखा जा सकता है।
