नई दिल्ली 08 मार्च 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पूरे भारत की छह खास महिलाओं को सौंपा है। अलग-अलग क्षेत्रों और क्षेत्रों से आने वाली इन महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियों और उपलब्धियों को राष्ट्र के साथ साझा किया भी है।उनकी भागीदारी भारत के भविष्य को आकार देने में महिलाओं की अहम भूमिका को उजागर करती है।
इस पहल से चुनी गई छह महिलाएं भारत के अलग-अलग हिस्सों से आती हैं, जिनमें तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार, ओडिशा, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं। वे खेल, ग्रामीण उद्यमिता और विज्ञान जैसे कई क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
वैशाली रमेशबाबू (Women’s Day 2025)
वैशाली रमेशबाबू चेन्नई की एक प्रतिभाशाली शतरंज खिलाड़ी हैं, जो छह साल की उम्र से ही प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। उनके समर्पण ने उन्हें 2023 में ग्रैंडमास्टर का खिताब दिलाया। उन्होंने 2024 में महिला विश्व ब्लिट्ज शतरंज चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी हासिल किया। वैशाली वैश्विक मंच पर अपनी रणनीतिक क्षमता से भारत को गौरवान्वित करती रहती हैं।
अनीता देवी (Women’s Day 2025)
‘बिहार की मशरूम लेडी’ के नाम से मशहूर अनीता देवी ने 2016 में माधोपुर फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी की स्थापना करके गरीबी पर काबू पाया। मशरूम की खेती के ज़रिए उन्होंने सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार के अवसर पैदा करके और वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देकर सशक्त बनाया है। उनके प्रयासों ने उनके समुदाय में आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान दिया है।
एलिना मिश्रा और शिल्पी सोनी (Women’s Day 2025)
एलिना मिश्रा और शिल्पी सोनी शोध और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाली प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं। एलिना मुंबई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में परमाणु वैज्ञानिक के रूप में काम करती हैं। वहीं, शिल्पी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं। उनका काम वैज्ञानिक प्रगति में भारतीय महिलाओं के योगदान का उदाहरण है।
अजयता शाह (Women’s Day 2025)
अजयता शाह फ्रंटियर मार्केट्स की संस्थापक और सीईओ के रूप में ग्रामीण उद्यमिता को बदल रही हैं। उनकी पहल 35,000 से अधिक डिजिटल रूप से सक्षम महिला उद्यमियों को आवश्यक सेवाएं प्रदान करके सशक्त बनाती है।
डॉ. अंजलि अग्रवाल (Women’s Day 2025)
डॉ. अंजलि अग्रवाल ने समावेशी गतिशीलता और बाधा-मुक्त बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए सार्वभौमिक सुलभता के लिए सामर्थ्यम केंद्र की स्थापना की। तीन दशकों से अधिक समय से, उनके काम ने पूरे भारत में विकलांग लोगों के लिए स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों को अधिक सुलभ बना दिया है।इन महिलाओं के योगदान से यह उजागर होता है कि भारतीय महिलाएं विकसित भारत को आकार देने में न केवल भागीदार हैं, बल्कि अग्रणी भी हैं।
