गौरतलब है कि लोकायुक्त पुलिस कोर्ट में निर्धारित 60 दिन में चालान पेश नहीं कर पाई, जिससे जमानत मिल गई है। लोकायुक्त कोर्ट की विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र ने लोकायुक्त पुलिस के 60 दिन में चालान पेश करने पर हैरानी जतायी है। 28 मार्च को सौरभ शर्मा और उसके साथियों के खिलाफ 60 दिन के अंदर चालान पेश करना था, इसके बावजूद अभी तक चालान पेश नहीं हुआ। हलांकि कोर्ट ने लोकायुक्त के इस रवैये पर हैरानी जताई. हालांकि जमानत मिलने के बाद भी सौरभ, शरद, चेतन फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएंगे. तीनों आरोपियों को ईडी के मामले में जेल में रहना पड़ेगा.
लोकायुक्त पर कांग्रेस के सवाल?-इस पूरे मामले में लोकायुक्त पुलिस की भूमिका शुरु से कठघरे में थी। पिछले दिनों लोकायुक्त डीजी जयपदीप प्रसाद के ट्रांसफर का मामला फिर खूब उछला था। लोकायुक्त डीजी के तबादले का मुद्दा विधानसभा में भी उठा था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जांच पर सवाल उठाते हुए सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। कांग्रेस ने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग की थी।नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सौरभ शर्मा केस की जांच में हीलावली का आरोपी लगाते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर आरोपियों को बचा रही है।
कैसे हुआ था खुलासा?-आरटीओ के पूर्व कॉस्टेबल सौरभ शर्मा ने सात साल की नौकरी में करोड़ों की काली कमाई का साम्राज्य खड़ा किय़ा था। भोपाल में रहने वाले पूर्व ट्रांसपोर्ट कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों पर 17 दिसंबर को लोकायुक्त ने जब सबसेपहले कार्रवाई की तो काली कमाई का जखीरा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। अब तक की कार्रवाई में सौरभ शर्मा के ठिकानों से 3 करोड़ रुपए की नगदी,50 लाख रुपए का सोना,दो क्विटंल चांदी की सिल्ली, चांदी के 10 किलो जेवर मिले है। इसके साथ भोपाल में एक निर्माणाधीन बंगला और एक स्कूल , भोपाल, इंदौर और ग्वालियर शहरों में प्रॉपर्टी और घर में नोट गिनने की सात मशीन मिली। सौरभ शर्मा ने महज सात साल ही नौकरी में करोड़ों की काली कमाई का साम्राज्य खड़ा किया।
आरटीओ का पूर्व कॉस्टेबल सौरभ शर्मा जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला था, उस पर लोकायुक्त ने कार्रवाई के दौरान ही भोपाल के मेंडोरा में एक फॉर्म हाउस से आरटीओ नंबर से रजिस्टर्ड इनोवा क्रिस्टा से 54 किलो सोना और 10 करोड़ नगद मिला था, जो भोपाल के एक फॉर्म हाउस में मिला था।
