देहरादून: जालसाज साइबर ठग ने विदेशी नागरिक को अरेस्टिंग का डर दिखाकर उनसे 30 लाख रुपये ठग लिए. ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग में नाम होने की बात कहकर झांसे में लिया. विदेशी नागरिक की तहरीर पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
गिरफ्तारी का दिखाया डर
साइबर क्राइम पुलिस को दी गई शिकायत में जर्मनी निवासी हरमन हेनरिक रोडर ने बताया कि वह उत्तरकाशी के कुंसी स्थित महर्षि आश्रम में योग व मेडिटेशन करवाते हैैं. उनका पासपोर्ट जुलाई 2025 तक वैलिड है. दो मार्च को उन्हें अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया और बताया कि वह कोलाबा पुलिस स्टेशन ग्रेटर मुंबई से बात कर रहा है. काल करने वाले व्यक्ति ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर भारत सरकार के प्रतीक वाले आइकन लगाया हुआ था. उसने बताया कि वह पुलिस के एक विशेष गुप्त विभाग के रूप में जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच कर रहे हैं. पूर्व चेयरमैन के घर में मिले कुछ दस्तावेज में उनका नाम भी है.
30 लाख रुपये ठग लिए
जालसाज ठग ने उन्हें जांच में में सहयोग न करने पर गिरफ्तारी करने की धमकी दी. कहा कि केस पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है. जिस कारण इसके बारे में किसी से चर्चा न करे. मामले की गोपनीयता भंग करने पर उनके बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. उन्हें मामले में बयान देने के लिए मुंबई आना पड़ेगा. यदि वह मुंबई नही आ सकते हैैं तो उनके खाते में जो भी धनराशि है उसे उनके एकाउंट में ट्रांसफर कर दो. जो कि बाद में उन्हें लौटा दी जाएगी. जिस पर विदेशी नागरिक ने चार मार्च को 11 लाख रुपये व छह मार्च को 19 लाख रुपये ट्रांसफर किए. इसके बाद भी ठग नहीं रुके और 36 लाख रुपये की और मांग की. जिस पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ.
दोस्तों से मांगे पैसे
पीडि़त ने बताया कि साइबर ठगों ने उन्हें इतना डराया कि उन्हें जर्मनी अपने दोस्तों से यूरो मंगवाए. उन्हें भारतीय मुद्रा में परिवर्तित करके भेजे. ठगों ने दो दिन में उन्हें 30 लाख रुपये की धनराशि ट्रांसफर करवाई. उन्होंने कुछ धनराशि अपने खाते में जबकि कुछ अपने दोस्तों से मंगवाई. साइबर ठग उन्हें लगातार गिरफ्तारी का डर दिखा रहे थे. जिसके कारण वह काफी डर गए थे.
