PM Modi meets Muhammad Yunus: थाईलैंड में आयोजित बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की. यह बैठक कई मायनों में खास रही, क्योंकि यह शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच पहली बैठक थी.
भारत-बांग्लादेश संबंधों में हाल के महीनों में आई ठंडक के बीच यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है. बिम्सटेक के दौरान दोनों नेताओं की नजदीकी ने भविष्य में रिश्तों के नए दौर की ओर इशारा किया है. गुरुवार रात हुए बिम्सटेक नेताओं के रात्रिभोज में भी दोनों नेता एक-दूसरे के पास बैठे नजर आए थे.
मोदी और यूनुस की मुलाकात
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद पीएम मोदी और पीएम यूनुस के बीच यह पहली मुलाकात थी. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूनुस को उनके कार्यभार संभालने पर एक बधाई पत्र भेजा था, लेकिन उस समय से अब तक दोनों देशों के संबंध शांत ही रहे. थाईलैंड में हुई यह बैठक इस दिशा में एक नई शुरुआत हो सकती है.
यूनुस के बयान पर बना था विवाद
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस हाल ही में दिए गए एक बयान के चलते चर्चा में आ गए थे. उन्होंने कहा था कि ‘पूर्वोत्तर भारत चारों ओर से स्थल से घिरा हुआ है और ढाका इस पूरे क्षेत्र के लिए महासागर का एकमात्र संरक्षक है.’ इस टिप्पणी को भारत में मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिली थीं और इसे भारत की भौगोलिक स्थिति को लेकर संवेदनशील बयान माना गया था.
जयशंकर ने पूर्वोत्तर भारत को बताया कनेक्टिविटी हब
बैंकॉक में आयोजित 20वीं बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूनुस के बयान का परोक्ष जवाब देते हुए पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को उजागर किया. उन्होंने कहा, “हमारा पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेष रूप से बिम्सटेक के लिए कनेक्टिविटी हब के रूप में उभर रहा है, जिसमें सड़कों, रेलवे, जलमार्गों, ग्रिडों और पाइपलाइनों का असंख्य नेटवर्क है. त्रिपक्षीय राजमार्ग के पूरा होने से भारत का पूर्वोत्तर प्रशांत महासागर तक जुड़ जाएगा, जो वास्तव में गेम-चेंजर होगा.”
