दंतेवाड़ा। ‘बस्तर पंडुम’ कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, आज चैत्र नवरात्रि की अष्टमी है। मैं अभी-अभी माँ दंतेश्वरी का आशीर्वाद लेकर आया हूँ कि अगली चैत्र नवरात्रि से पहले संपूर्ण छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो जाए और हमारा बस्तर खुशहाल हो जाए, जब आज पूरा बस्तर लाल आतंक से मुक्त होने की कगार पर है और विकास के रास्ते पर चल चुका है, तब महाराजा प्रवीण रंजन देव जी की आत्मा जहाँ पर भी होगी जरूर वहाँ से बस्तर के वासियों को अपना आशीर्वाद दे रही होगी।
आगे शाह बोले, आदिवासियों की जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले महाराजा प्रवीण रंजन देव जी की लोकप्रिय कांग्रेस से सहन नहीं हुई शाजिस के तहत उनकी हत्या करवा दी। ‘बस्तर पंडुम’ को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिलाने और बस्तर के हर जिले की परंपरा, संस्कृति और कला को पूरे विश्व तक पहुंचाने का काम मोदी सरकार करेगी।
इस वर्ष ‘बस्तर पंडुम’ छत्तीसगढ़ में एक उत्सव की तरह मनाया गया है। अगले वर्ष मोदी सरकार ‘बस्तर पंडुम’ में देशभर सभी आदिवासी क्षेत्रों के कलाकारों के लेकर आएगी। बस्तर की संस्कृति, बोलियां, यहाँ के गान-वाद्य, पेय पदार्थ और भोजन, भारत की संस्कृति का गहना भी है जिसे हमें सजों कर रखना है। जो गाँव सभी नक्सलियों को सरेंडर करवाएगा, उस गाँव को नक्सल मुक्त गाँव घोषित कर के 1 करोड़ रूपये की विकास राशि भाजपा सरकार देगी।
बस्तर में शांति तभी हो सकती है, जब बच्चे स्कूल में जाएं, माताओं के स्वास्थ्य की चिंता हो, आदिवासी युवा कुपोषण से पीड़ित ना हो और उसकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था हो, हर गाँव में एक दवाखाना हो, हर तहसील में अस्पताल हो, हर घर में 7 किलो चावल मुफ्त पहुंचता हो, सभी के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और स्वास्थ्य का बीमा हो। यह तभी हो सकता है जब बस्तर के लोग तय करें कि, यहाँ का हर गांव नक्सलमुक्त बनेगा।
वो जमाना चला गया जब यहाँ पर गोलियां चलती थी, बम धमाके होते थे। जिनके हाथों में हथियार हैं उनसे विनती करता हूँ कि हथियार डालकर मेनस्ट्रीम में आइए क्योंकि आप हमारे अपने हैं। कोई नक्सली मारा जाता है किसी को आनंद नहीं होता है। इस क्षेत्र को विकास चाहिए। बीते 50 वर्षों में जो विकास यहाँ नहीं पहुंचा, मोदी जी 5 साल में विकास को यहाँ पहुंचाएंगे।
वर्ष 2024 में 881 नक्सलियों ने सरेंडर किया और 2025 में अब तक 521 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। जो सरेंडर करेंगे, वो मेनस्ट्रीम में आएंगे और जो हथियार लेकर चलेंगे उनके लिए हमारे सुरक्षाकर्मी मोर्चा संभालेंगे। अगले मार्च तक पूरा देश लाल आंतक से मुक्त होकर रहेगा। जहाँ कभी गोलियों की गूंज थी, आज वहाँ मशीनों की आवाज आती है। गाँव जो वीरान थे, वहाँ अब स्कूलों की घंटियां बज रही हैं। जहाँ सड़क बनाना भी सपने जैसा लगता था, वहाँ राजमार्ग बन रहे हैं और जहाँ बच्चा स्कूल जाने को डरता था, वहीं अब कम्प्यूटर के माध्यम से पूरे विश्व के साथ बात कर रहा है।
बस्तर का विकास इसलिए हो रहा है क्योंकि अब नक्सलवाद के साथ कोई नहीं जुड़ रहा है।
