संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इस परीक्षा को पास करने के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और मजबूत रणनीति की भी जरूरत होती है।
ऐसे में कई बार असफलता से हताश होने के बजाय उससे सीखना ही सफलता की कुंजी बनता है। कुछ ऐसी ही कहानी है IAS कुमार अनुराग की, जिन्होंने अपनी असफलताओं को पीछे छोड़कर 2018 में UPSC CSE में ऑल इंडिया 48वीं रैंक हासिल की।
कॉलेज में हुए फेल, लेकिन नहीं मानी हार
बिहार के कटिहार जिले से ताल्लुक रखने वाले कुमार अनुराग आज भले ही भागलपुर जिले में डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर (DDC) के पद पर तैनात हैं, लेकिन उनकी राह इतनी आसान नहीं थी। अनुराग ने 8वीं तक पढ़ाई हिंदी मीडियम में की थी। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से करने का निर्णय लिया। मीडियम बदलने के चलते उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
शिक्षा का सफर: हिंदी मीडियम से लेकर दिल्ली तक
मीडियम बदलने के बाद अनुराग ने 10वीं और 12वीं में शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के इस सफर में एक वक्त ऐसा भी आया जब वे कॉलेज में फेल हो गए थे, लेकिन उन्होंने इसे अपने सपनों के रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया।
IAS बनने की शुरुआत और रणनीति
अनुराग ने अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। वे कहते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा में सफलता किसी की पिछली शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर निर्भर नहीं करती। अगर आप एक ठोस रणनीति के साथ तैयारी करें, तो कोई भी इसे पास कर सकता है। वे यह भी कहते हैं कि जल्दबाजी करने के बजाय हर विषय पर गहराई से रिसर्च करना जरूरी होता है।
IAS अनुराग का सक्सेस मंत्र
नई शुरुआत करें: पिछली पढ़ाई या कमजोरियों को भूल जाएं।
धीरे और ठोस तैयारी करें: जल्दबाजी न करें, हर टॉपिक को समझें।
सही रणनीति अपनाएं: टाइम टेबल बनाएं और खुद को आंकें।
किसी विषय से डरें नहीं: भले ही विषय नया हो, मेहनत से सब संभव है।
IAS अनुराग की कहानी यह दिखाती है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो कोई भी परिस्थिति आपको रोक नहीं सकती। कॉलेज में फेल होने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और अंत में IAS अफसर बनकर देश की सेवा में लग गए। उनकी यह यात्रा हर UPSC उम्मीदवार के लिए प्रेरणा है।
