पिछले साल दिसंबर के आखिर में तुर्की के अधिकारियों ने चौंकाने वाली सूचना दी कि देश के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में पिछले छह हफ्ते में ज़हरीली अवैध शराब पीने से 34 लोगों की मौत हो गई और 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया.इस घटना के कुछ हफ़्ते पहले लाओस में छह पर्यटकों की मिलावटी ज़हरीली शराब पीने से मौत हो गयी. जून 2024 में भारत के तमिलनाडु में ज़हरीली देसी शराब पीने से कम से कम 56 लोगों की मौत हो गई.
दुनिया में कई जगह शराब बनाने संबंधी कड़े नियमों का उल्लंघन करके मिलावटी शराब बनाई जाती है जो कि खतरनाक साबित हो सकती है.
इस सप्ताह दुनिया जहान में हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि क्या मिलावटी या नकली शराब दुनियाभर में ख़तरा बन रही है.
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खतरनाक शराब
अमेरिका के केनस्वा शहर में वेलस्टार कॉलेज ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज़ की प्रोफ़ेसर मोनिका स्वान कहती हैं कि अवैध शराब की समस्या दुनिया के अधिकांश हिस्सों में है और इस पर नियंत्रण रखना मुश्किल है.
कई बार असली शराब में पानी या दूसरे पदार्थों की मिलावट करके नकली शराब बना कर उसकी तस्करी की जाती है. इसकी बोतल कई बार देखने में असली शराब की बोतल जैसी ही दिखती है और लोग समझ नहीं पाते कि वो नकली शराब पी रहे हैं.
“जिन देशों में शराब के उत्पादन संबंधी कड़े नियम होते हैं और उसकी बिक्री की निगरानी होती है, वहां नकली अवैध शराब कम मिलती है. अवैध शराब की बिक्री आम तौर पर उन ग़रीब क्षेत्रों में अधिक होती है, जहां इसकी निगरानी कड़ाई से नहीं होती. इस कारण अवैध ज़हरीली शराब से जुड़ी वारदातें पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया, भारत और अफ़्रीकी देशों में अधिक होती है. आम तौर पर इस प्रकार की देसी शराब जहां बनती है, उसे आसपास के इलाकों में बेचा जाता है. इसका उत्पादन देश के दूसरे हिस्सों या बाहर निर्यात के लिए नहीं होता.”
मोनिका स्वान युगांडा में शराब की लत पर शोध कर रही हैं. वो कहती हैं कि कई जगहों पर लोग त्योहार मनाने कि लिए इसे अवैध तरीके से बना कर पीते हैं और कई लोग इसका इस्तेमाल तस्करी के लिए भी करते हैं.
अवैध तरीके से बनाई गई शराब वैध तरीके से कड़े नियमों के अनुसार फैक्ट्रियों में बनाई गई शराब के मुकाबले काफी सस्ती होती है. मगर कई बार अवैध तरीके से बनाई अल्कोहल तस्करी के जरिए बार और पब तक भी पहुँच जाती है. यहां इसे कॉकटेल में मिलाकर परोस दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि अवैध अल्कोहल या शराब के खतरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
“फ़र्ज़ी अल्कोहल के कई खतरे हैं. एक तो यह कि इसके उत्पादन और गुणवत्ता की कोई निगरानी नहीं होती. यह भी नहीं देखा जाता कि यह कितनी तेज़ या नशीली है. कई बार अवैध तरीके से शराब बनाने वाले लोग उसमें ऐसे पदार्थों की मिलावट कर देते हैं, जिससे वो अधिकी नशीली हो जाती है और इससे स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो जाता है.”
मगर आगे बढ़ने से पहले यह समझ लेना ज़रूरी है कि अल्कोहल दो तरह की होती है. एथेनॉल और मेथेनॉल.
मोनिका स्वान ने बताया, “रासायनिक तौर पर एथेनॉल और मेथेनॉल में अंतर मामूली है, लेकिन मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर में अंतर है. एथेनॉल का इस्तेमाल बियर और व्हिस्की जैसी शराब में होता है. लेकिन मेथेनॉल बहुत खतरनाक साबित हो सकती है. कई रिपोर्ट के अनुसार, इसके सेवन से लोग अंधे हो गए या मर गए. इसे मेथेनॉल पॉइजनिंग कहते हैं.”मेथेनॉल के सेवन से मनुष्य को चक्कर आने लगता है और इससे शरीर के भीतरी अंगो को नुकसान हो सकता है. यहां तक कि शरीर को लकवा भी मार सकता है.
मोनिका स्वान का कहना है कि मेथेनॉल का ज़हर शरीर में फैलने के लक्षण कई बार तुरंत सामने नहीं आते और इसमें एक-दो दिन का समय लग जाता है. इस कारण कई बार लोग समय पर इलाज के लिए अस्पताल नहीं जा पाते. कई बार इसके पीते ही ज़हर शरीर में फैलना शुरू हो जाता है.
इससे बचने के क्या तरीके हैं. मोनिका स्वान के अनुसार, बेहतर तो यह ही है कि ग़रीब क्षेत्रों में ऐसी शराब पीने से बचें. अगर पीना ही है तो वो बियर पिएं जो कि बंद कंटेनर में आती है. इस दौरान ये भी देखना चाहिए है कि इसकी सील टूटी नहीं हो. अगर कोई बहुत सस्ती शराब बेच रहा है तो उसे पीने से बचिए क्योंकि इसमें मिलावट हो सकती है.
विशाल स्तर
खाद्य रसायनों के विशेषज्ञ और जर्मनी की खाद्य सामग्री की निगरानी करने वाली संस्था सीवीयूए कार्ल्सरूह के वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर डर्क लेखिनमायर कहते हैं, “नकली अल्कोहल का पता लगाना मुश्किल होता है.”
वो बताते हैं, अल्कोहल वैसे तो एक रसायन है, लेकिन इसे शक्कर युक्त पदार्थों, फलों को फ़र्मेंट या किण्वन कर के बनाया जाता है. लेकिन मेथेनॉल केवल शराब में इस्तेमाल नहीं होती.
“मेथेनॉल के अंश हर किस्म की शराब में होते हैं. इसमें बियर और वाइन भी शामिल है. इसे पीना सुरक्षित है क्योंकि इसमें इसकी मात्रा इतनी ज्यादा नहीं होती कि वे उस शराब को ज़हरीला बना दे.”
अवैध शराब में मेथेनॉल की मात्रा कहीं अधिक हो सकती है.
डर्क लेखिनमायर कहते हैं, “जिस मात्रा में शराब में एथेनॉल होती है, उतनी ही मात्रा में अगर मेथेनॉल हो तो उसे पीने से मौत हो सकती है. आम तौर पर मेथनॉल का इस्तेमाल पेंट और प्लास्टिक जैसे कई औद्योगिक उत्पादों में होता है ना कि खाने पीने की चीज में. यह एक रंगहीन रसायन है और इसकी गंध अल्कोहल जैसी ही होती है.”
डर्क लेखिनमायर का कहना है किसी ड्रिंक में अगर मेथेनॉल हो तो रसायन विज्ञानी इसे आसानी से पहचान सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उसमें इसकी मात्रा काफ़ी अधिक होती है, लेकिन सामान्य उपभोक्ताओं के लिए इसे पहचाना मुश्किल है.
कई देशों में अल्कोहल का उत्पादन कितना हो इस बारे में कड़े नियम बने हुए हैं.
डर्क लेखिनमायर ने कहा, “इस बारे में संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिशा निर्देश जारी किए हुए हैं. यूरोपीय संघ के देशों में इस पर कानून बने हुए हैं. शराब में कितनी अल्कोहल हो या कितनी मात्रा में मेथेनॉल हो इस बारे में भी नियम बने हुए हैं. यहां तक की कीटनाशकों में मेथेनॉल की मात्रा कितनी हो इसकी सीमा तय की गयी है, लेकिन कई देशों में अल्कोहल के उत्पादन में कड़ी प्रक्रिया नहीं अपनायी जाती. कई जगहों पर पुराने तेल के बैरलों के नीचे आग जला कर अल्कोहल बनाई जाती है. हमारे शोध के अनुसार सबसे ज्यादा खतरनाक मेथेनॉल की मिलावट है.”
अवैध शराब से कितने लोग अब तक मारे गए हैं या बीमार पड़े हैं, इसका पता लगाना मुश्किल है.
डर्क लेखिनमायर कहते हैं कि यूके और यूरोपीय संघ में जिस प्रकार की स्वास्थ्य व्यवस्था है, उसकी वजह से अगर मेथेनॉल पॉइजनिंग से किसी की मौत होती है तो उसे दर्ज कर लिया जाता है, लेकिन कई देशों में ऐसा नहीं होता. कई बार तो ज़हरीली शराब से लोगों के मरने की सही ख़बरें भी नहीं छपती. कई लोग शराब में मेथेनॉल का इस्तेमाल मुनाफे के लालच में करते हैं. यह एक भयंकर समस्या है और जितना दिखाई देती है उससे कहीं अधिक बड़ी है.
ख़तरनाक कॉकटेल
ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन में वरिष्ठ अर्थशास्त्री पियोर स्ट्रीसज़ावस्की के अनुसार, अवैध शराब का धंधा संगठित अपराधी गिरोह चला रहे हैं.
“अवैध शराब का धंधा करने वाले गिरोह नहीं चाहते कि आपको पता चले कि आप अवैध शराब पी रहे हैं. अगर आपने नकली शराब ख़रीदी है या किसी पब या बार में ऐसा कॉकटेल पिया है, जिसमें अवैध शराब मिली हुई है तो आपका पैसा इन गिरोहों को ही मिलता है. इससे आपकी सेहत और ज़िंदगी जोखिम में पड़ती है.”
दूसरी ग़ौरतलब बात यह है कि इन अपराधी गिरोहों के लिए अवैध शराब का धंधा अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला है.
पियोर स्ट्रीसज़ावस्की कहते हैं कि कई देशों में कोकीन जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए मौत की सज़ा दी जाती है. वहीं अवैध शराब बनाने या उसकी तस्करी करने के लिए सज़ा उतनी कठोर नहीं होती.वो बताते हैं कि यह अपराधी गिरोह बदलती स्थिति के साथ ख़ुद को ढालते रहते हैं. ऐसा ही कुछ 2020 में कोविड महामारी के दौरान हुआ.
पियोर स्ट्रीसज़ावस्की ने कहा , “उस दौरान कई देशों ने शराब संबंधी नीतियों में बदलाव कर दिया था. मिसाल के तौर पर दक्षिण अफ़्रीका और मेक्सिको के कई प्रांतों में शराब की दुकाने बंद कर दी गई थी. वहीं कुछ ने ऑनलाइन शराब की बिक्री के नियमों में ढील दे दी थी. अपराधी गिरोहों ने इस स्थिति का फ़ायदा उठाया. शराब की दुकानों पर लगी पाबंदी हटने के बाद भी अवैध शराब सप्लाई करने वाले गिरोहों की गतिविधियां चलती रही. वो सीमापार अवैध शराब की तस्करी करते रहे. साथ ही वो भलीभांति जानते हैं कि किस से देश में क्या नियम हैं और कैसे जोखिम को कम किया जा सकता है.”
मगर क्या अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर रोक नहीं लगायी जा सकती?
इसके जवाब में पियोर स्ट्रीसज़ावस्की ने कहा, “काश,इस अवैध व्यापार को रोकने का कोई आसान हल होता. मैं 18 साल से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूँ. मुझे लगता है कि यह तभी संभव है जब इसकी रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग हो साथ ही इसमें नीति बनाने वालों और आम जनता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है.”
कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता
अमेरिकी संस्था ट्रांसनेशनल अलायंस टू कॉम्बैट इलिसिट ट्रेड का उद्देश्य अवैध व्यापार का पता लगा कर उसे रोकना है. दुनिया की लगभग 1500 कंपनियां या ब्रांड इस संस्था के सदस्य हैं. इसमें दवा बनाने वाली कंपनियां और शराब बनाने वाली कंपनियां भी शामिल है.
संस्था के महानिदेशक जेफ़ हार्डी कहते हैं कि अवैध शराब के व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए जो किया जाना चाहिए,वो नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अवैध शराब की तस्करी की समस्या लंबे समय से चली आ रही है.
“अमेरिकी हूँ और हमने देखा है कि जब अमेरिका में शराबबंदी का दौर था तब भी अवैध शराब की समस्या थी. सौ साल से यह समस्या बरकरार है. कई बार अवैध शराब ज़हरीली होती है और इसे पीने वालों को बहुत नुकसान हो सकता है.”
आज भी कई देशों में इस बारे मे कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है.
जेफ़ हार्डी ने कहा, “विकासशील देशों में शराब के बाज़ार को देखा जाए तो अफ़्रीका, लातिनी अमेरिका और दक्षिण पूर्वी एशिया में शराब के बाज़ार में बिकने वाली कुल शराब में 35 से 50 प्रतिशत तो अवैध शराब है. इसे रोकने के लिए कई देशों में कदम उठाए जा रहे हैं,लेकिन इससे बहुत ज्यादा प्रयास करने की ज़रूरत है.”
संयुक्त राष्ट्र की नशीले पदार्थों संबंधी संस्था और विश्व व्यापार संगठन जैसी कई संस्थाएं भी इस दिशा में काम कर रही हैं
जेफ़ हार्डी की राय है कि अवैध व्यापार पर नकेल कसने के लिए सभी संस्थाओं में अधिक आपसी समन्वय बढ़ाना पड़ेगा.
उन्हें एक दूसरे के संसाधनों का इस्तेमाल भी करना चाहिए. इसके साथ ही इन संस्थाओं को विश्वभर के देशों की सरकारों के साथ मिल कर काम करना चाहिए.
जेफ़ हार्डी कहते हैं कि कई कंपनियां अवैध व्यापार की चुनौती को गंभीरता से ले रही है.
अपने उत्पाद और हितों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है. उन्होंने कई ऐसी संस्थाएं बनाई है जो कि सरकारों को इस समस्या की पेचीदगी और इसे निपटने के प्रयासों के बारे में अवगत कराती है.
अवैध शराब का व्यापार करने वाले गिरोह नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी में भी शामिल हो सकते हैं.
जेफ़ हार्डी ने कहा, “अवैध व्यापार करने वाले गुट कई प्रकार की अपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं. हम उसे पॉली क्रिमिनालिटी कहते हैं. यूरोपीय संघ ने इस पर नियंत्रण करने के लिए कई अच्छे कदम उठाए हैं.”
पिछले साल जुलाई में यूरोपीय संघ के धोखाधड़ी विरोधी विभाग की एक बहुराष्ट्रीय टीम ने कार्रवाई करके यूरोप और उसके बाहर तस्करी करने वाले एक गिरोह को पकड़ लिया. साथ ही मालवाहक जहाजों पर छापा मार कर उनके कंटेनर से नकली व्हिस्की और वोदका की चार लाख बोतल जब्त कर ली.
