एपी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और कार्यकारी संपादक जूली पेस ने इसे चिंताजनक और अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन का सीधा उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा, यह प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है। हम प्रशासन से इस तरह की कार्रवाई तुरंत रोकने की अपील करते हैं। मामले में व्हाइट हाउस पत्रकार संघ के अध्यक्ष यूजीन डेनियल्स ने भी एपी का समर्थन करते हुए कहा कि मीडिया को इस तरह से रोकना सरकार की मनमानी दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘सरकार के खिलाफ रिपोर्टिंग करने की वजह से पत्रकारों को बाहर करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।
’व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने लगाया आरोप
इधर, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रपति को यह तय करने का अधिकार है कि कौन से पत्रकार व्हाइट हाउस में प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने एपी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और कहा, ‘हम यह तय करेंगे कि किन मीडिया संस्थानों को राष्ट्रपति से सवाल पूछने की अनुमति होगी।’
कहां से शुरू हुआ विवाद?
डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही कई नाम बदलने के आदेश दिए थे। उन्होंने अलास्का के प्रसिद्ध पर्वत डेनाली का नाम फिर से माउंट मैकिनले कर दिया था और मैक्सिको की खाड़ी को अमेरिका की खाड़ी नाम दिया था। एपी ने माउंट मैकिनले का नाम बदलने को स्वीकार किया, क्योंकि यह पूरी तरह अमेरिकी सीमा के भीतर है। लेकिन मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसका कुछ हिस्सा मैक्सिको की सीमा में भी आता है।
गूगल और एप्पल मैप ने नाम बदला
बता दें कि, गूगल मैप और एप्पल मैप ने अब इस जलक्षेत्र का नाम बदलकर अमेरिका की खाड़ी कर दिया है। इस बीच, मैक्सिको की राष्ट्रपति ने कहा है कि वह इस बदलाव को लेकर गूगल पर कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रही हैं।
