Mahakumbh 2025: महाकुंभ 2025 में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। बसंत पंचमी के अवसर पर तीसरे अमृत स्नान में लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार भोर 3:30 बजे से ही स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सख्त इंतजाम किए गए हैं। अब तक 35 करोड़ से ज्यादा लोग महाकुंभ में स्नान कर चुके हैं, और यह संख्या 50 करोड़ पार करने की उम्मीद है।
सुबह 3:30 बजे से ही CM योगी आदित्यनाथ लखनऊ में अपने सरकारी आवास से महाकुंभ वॉर रूम के जरिए सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए थे। उनके साथ प्रमुख सचिव (गृह), डीजीपी और अन्य उच्च अधिकारी लगातार अपडेट ले रहे थे। प्रशासन ने इस बार भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी है, खासकर मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ के बाद।
सुबह 8 बजे तक 62 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई बसंत पंचमी पर डुबकी
प्रशासन के अनुसार, 3 फरवरी की सुबह 8 बजे तक ही 62 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में अमृत स्नान कर चुके थे। नागा साधुओं ने इस स्नान को और खास बना दिया, जब वे अपने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों के साथ अनुष्ठान करते नजर आए। इस नजारे ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रयागराज में सरकारी दफ्तरों में छुट्टी घोषित?
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट ने जिले के सभी सरकारी कार्यालयों में 3 फरवरी को अवकाश घोषित कर दिया। यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारू रखने के लिए उठाया गया है।
भगदड़ के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम
29 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें 30 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। इस घटना से सबक लेते हुए बसंत पंचमी पर खास सुरक्षा इंतजाम किए गए। भीड़ नियंत्रण, मेडिकल सुविधाओं और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाया गया, ताकि अमृत स्नान बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सके।
संतों ने महाकुंभ और योगी सरकार की सराहना की
महाकुंभ के दौरान कई संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को पूरी दुनिया देख रही है, और योग, आयुर्वेद व ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश को फैलाने में कुंभ की बड़ी भूमिका है।
निरंजनी अखाड़े के आचार्य कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के साथ अमृत स्नान का विशेष महत्व है, और योगी आदित्यनाथ जैसे नेता ही इस परंपरा को सही मायने में सम्मान देते हैं।
महाकुंभ का संदेश: एकता और शांति
महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और एकता का संदेश भी देता है। अटल पीठाधीश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने कहा कि यहां हर जाति और धर्म के लोग एक साथ आते हैं, जिससे भाईचारे और समृद्धि की भावना को बढ़ावा मिलता है।
इस आयोजन से एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया गया-पर्यावरण संरक्षण। संतों ने ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने का संकल्प लेने की अपील की।
महाकुंभ 2025 का समापन और आगे की उम्मीदें
महाकुंभ के 23 दिन अभी बाकी हैं, और श्रद्धालुओं की संख्या 50 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण स्नान पर्व होंगे, जिसके लिए प्रशासन ने पहले से ही योजनाएं तैयार कर ली हैं। महाकुंभ 2025 न सिर्फ आस्था का संगम है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं की झलक भी प्रस्तुत कर रहा है।
