Commodity Market: रुपये में आई गिरावट बिगाड़ेगी किचन का बजट, खाने के तेल और गेहूं के दाम होंगे महंगे

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ने वाले दिनों में आपका खाने का तेल महंगा होने वाला है। रुपये की कमजोरी की मार आपके किचन पर पड़नी तय है। दरअसल, रुपए में आई कमजोरी का असर आपके खाने के तेल (Edible Oil Price) पर पड़ सकता है।

सभी खाने के तेल महंगे हो सकते हैं।

बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी खाने का तेल इंपोर्ट करता है। पिछले 1 महीन में ही खाने के तेल के दाम 5 फीसदी तक बढ़त देखने को मिली है। इससे पहले सितंबर में सरकार ने खाने के तेल के इंपोर्ट पर ड्यूटी लगाई थी। सितंबर से अब तब खाने के तेल की कीमतें 40% तक बढ़ी है

CAIT के आंकड़ों के अनुमान के मुताबिक आज से 1 महीने पहले पाम ऑयल (Palm Oil) 140 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा था, जबकि अब इसकी कीमत बढ़कर 146 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं सोयाबीन ऑयल (Soyabean Oil) 128 रुपये से बढ़कर 135 रुपये प्रति लीटर हो गया है जबकि मूंगफली का तेल 1 महीने पहले 183 रुपये से बढ़कर 185 रुपये प्रति लीटर का हो गया है।

इसी तरह सरसों के तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है। सरसों का तेल 163 रुपये से बढ़कर 166 रुपये और वनस्पति 148 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति लीटर का हो गया है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में 5% की गिरावट आई है। रुपये की गिरावट का असर खाने के तेल की कीमतों पर संभव है। क्योंकि FMCG कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गई है। ज्यादा कीमतें बढ़ने का खपत पर असर होगा।

गेहूं के दाम कुछ राज्यों में बढ़े

इस बीच एग्री कमोडिटी से ही एक और अहम खबर सामने आई है। OMSS के जरिए गेहूं के दाम कुछ राज्यों में बढ़ गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बाजार इससे चिंतित है। वहीं उसे ये भी डर सता रहा है कि मार्च से सरकार OMSS के जरिए गेहूं की बिक्री बंद कर सकती है।

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